What Are Emotions Called? (Part - 02) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 02)
- Jul 18, 2025
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Updated: Jul 24, 2025
दिनांक : 18.07.2025

डाक्टर मेगन के शोध के अनुसार भावनाएं, हमारी शारीरिक संवेदनाअेा के बारे में बताई गई, कथा के संयोजन से उत्पन्न होती है। हमारी शारीरिक संवेदनाऍ संकेतो के रुप में कार्य करती है, जो हमें आंतरिक और बाहरी वातावरण की जानकारी प्रदान करती है। हॉलाकि, इन संवेदनाओं के बारें में हमारे मन की धारणा और विश्वास, विशिष्ट भावनाओं को जन्म देते है। शोधो से यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि भावनाओं की उत्पत्ति और उनके प्रकटीकरण में मन की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जिन भावो को, हमारे विचारो ने जन्म दिया हैं, उनसे हमारा जीवन प्रभावित होता हैं। जीवन की सकारात्मक और नकारात्मक यादें और अतीत, हमारे वर्तमान को भी प्रभावित करता हैं। भावनाएं संस्कृति से भी प्रभावित होती है। जैसे कई संस्कृतियॉ, भावनाओ को अभिव्यक्त करने की पूर्ण स्वतंत्रता देती है। लेकिन कई संस्कृतियों मे भावनाओ को व्यक्त करने का दायरा सीमित होता हैं। भावनाए, हमारे निर्णय लेने की शक्ति को भी प्रभावित करती हैं। भावनाओ से निजी रिश्ते भी प्रभावित होते हैं। जब हम, किसी ऐसे व्यक्ति से मिलते है जो हमारी विचारधारा के अनुरुप होता है तो उससे मिलन प्रीतिकर लगता है। हमारे पसंद के व्यक्ति से मिलन, प्रेम भाव को ओर प्रगाढ करता हैं।
हम यह भी कह सकते है कि भाव, मन के क्षणिक आवेग से मस्तिष्क में कार्यशील होकर आवेग के अनुसार कार्य करने को प्रेरित करते है जबकि विचार, शुद्द मानसिक संवेदना के कारण उत्पन्न होनें से, इनमें तुलनात्मक रुप से अधिक स्थायित्व होता है। अतः इनमें दूरदर्शिता प्रकट होती हैं। विज्ञान के अनुसार, हर क्रिया की प्रतिक्रिया होती हैं। हमारी क्रिया सकारात्मकता व स्वच्छ मनोभावयुक्त होगी तो परिणाम भी सुखद होगें। यह प्रश्न फिजूल हैं कि हम किसी के प्रति शुभ विचार रखे और सामने वाला हमारे प्रति अशुभ विचारो से भरा हुआ हो तो हमें भी उसके जैसा हो जाना चाहिए।
ऐसा नही है। बुर्जुगो ने कहा हैं कि नेकी कर और दरिया में डाल।
ओशो एक बोध कथा सुनाते है- एक व्यक्ति का नए गॉव में आगमन हुआ। उसने एक वृद्द व्यक्ति से पूछा कि मै इस गॉव में बसना चाहता हूॅ। आप तो बुजुर्ग है। कृपया मुझे बताए कि यहॉ के लोग कैसे है? उस बजुर्ग ने इस प्रश्न का सीधा उत्तर नहीं दिया बल्कि उस व्यक्ति को गौर से देखकर प्रति प्रश्न किया कि -‘
'‘ तुम जिस गॉव से आए हो, उस गॉव के लोग कैसे है?'’
आगंतुक ने सपाट स्वर में कहा-
‘‘उस गॉव के लोग बेईमान, झुठे और मक्कार है।‘‘
‘‘परंतु इस गॉव के लोग तो बेईमान, झूठे, मक्कार के अलावा हिंसक भी है। तुच्छ बातो पर मरने-मारने पर उतारु हो जाते है।‘‘ उस बुजुर्ग ने जवाब दिया।
वह व्यक्ति तो बुजुर्ग की बात सुनकर अपना सा मुॅह लेकर चला गया। एक घंटे बाद, उसी बजुर्ग के पास, किसान जैसा नजर आने वाला व्यक्ति आया और उसने पूछा-
‘‘मै पास के ही गॉव में रहता हूॅ। जमीन में पानी खत्म हो जाने से रोजगार नहीं रहा। मै इस गॉव में रहकर गुजर बसर करना चाहता हूॅ। यहॉ के लोग कैसे है, बाबा।'’
बुजुर्ग ने वही प्रश्न दोहराया-‘‘ तुम जिस गॉव को छोडकर आ रहे हो, वहॉ के लोग कैसे है?'’
‘‘ उस गॉव के लोग बहुत अच्छे हैं। प्रेम से रहते है। वहॉ जमीन में पानी खत्म नही होता तो मै कभी भी उस प्यारे गॉव को नहीं छोडकर नहीं आता। ‘‘
‘‘ इस गॉव के लोग भी प्रेम भाव से ओतप्रोत हैं। शिक्षित है। बाहर से आकर बसने वालो को अतिथि का दर्जा देते है। आतिथ्यपूर्ण मानसिकता के लोग है। भले लोग रहते हैे। तुम इस गॅाव में आकर आनंदित होअेागे‘‘
आगंतुक खुश हुआ। उसने मन ही मन सोचा कि उसका चुनाव अच्छा रहा। इस प्रकार जिसकी, जैसी सोच, वैसे ही उसके भाव। कबीरदास भी कहते है--मै बुरे व्यक्ति की खोज में निकला था लेकिन मुझे कोई बुरा आदमी ही नहीं मिला। जब मैने मेरे भीतर झॉककर देखा तो पता लगा कि मुझसे बुरा तो कोई नहीं हैं।
आगे जारी है ....... .......



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