What Are Emotions Called? (Part - 24) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 24)
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दिनांक : 19.04.2026

यह भी कहा जाता है कि परमात्मा का ध्यान आकृष्ट करने का अचूक अैाजार कृतज्ञता हैं। परमात्मा के उपकार, अनुगृह, अनुकंपा को सदैव याद रखने से मन में कृतज्ञता का बीज अंकुरित होने लगता है जो हमारी भावनाअेा के शुद्विकरण में योगदान देता हैं। श्री हरपाल अपनी प्रसिद्व पुस्तक -हररोज कृतज्ञता का अभ्यास मे लिखते हैं कि यदि जीवन में कृतज्ञता का भाव समाविष्ट हो जाए तो जीवन में रोजाना छोटे बडे चमत्कार घटित होना प्रारंभ हो जाते है। वे दावा करते हैं कि लगातार अटठाइस दिन तक प्रतिदिन दस कृतज्ञता के वाक्य लिखने होगें। साथ ही साथ कृतज्ञता प्रकट करने के कारण भी लिखने होगें। इस चमत्कार को घटित कराने हेतु नकारात्मक चीजो से परहेज करना होगा। यदि हम किसी के प्रति निेदा का भाव सजोये हुए हैं या अभावो का राग अलापते रहते हैं तो यह कृत्य, कृतज्ञता के बीज को अंकुरित होने से रोकता हैं। मात्र लेने की मानसिकता ने अडचने पैदा कर दी हैं। हम दुआ भी मॅागते है तो सिर्फ अपने लिए। दूसरो के लिए दुआ मॅागना भी भारी काम लगता है। प्रत्येक वस्तु, जो हमें मिल रही है उससे अल्लाह के आर्शीवाद की याद आनी चाहिए। यह शब्द अल्लाह पर यकीन अैार श्रृदा को मजबूत करता है। यह शक्तिशाली शब्द माना गया हैं। इस शब्द के उच्चारण का अर्थ होता हैं कि हम अल्लाह कर संप्रभूता अैार उसकी हमारे जीवन में प्रत्येक पल उपस्थिति स्वीकार करते हैं। अधिकांशतया इस शब्द का प्रयोग अल्लाह का शुकरिया अदा करने के लिए किया जाता है। संपूर्ण प्रशंसा अल्लाह की है। इस शब्द में संपूर्ण कृतज्ञता भाव समाविष्ट हो जाता है। इस शब्द का प्रयोग हमारे भावो को शुद्व करने का महत्वपूर्ण उपकरण बन सकता है। शर्त इतनी सी हैं कि इस शब्द का उच्चारण ह्रदय की गहराइयो से किया जाए।
अेाशो ने परमात्मा की अनुकंपा अैार शरीर के चमत्कारो को महाबलेश्वर के शिविर में स्पष्ट किया कि-
‘’ वैज्ञानिको ने अप्रत्यासित विकास किया है। यदि हम बहुत बडे कारखाने खोल दे अैार उनमें हजारो विशेषज्ञो की नियुक्ति दे तो भी एक रोटी को पचा कर खून बना देना मुश्किल हैं। आपका यह शरीर चमत्कार कर रहा हैं। यह छोटा सा शरीर, थोडी सी हडडिया अैार थोडा सा मॅास। वैज्ञानिक कहते हैं, मुश्किल से चार पाॅच रुपये का सामान है, इस शरीर में। इतना बडा चमत्कार फिर भी शरीर के प्रति कृतज्ञता का भाव नहीं। '’
अेाशो, हमारे से ही सवाल करते हैं कि क्या आपने कभी अपने शरीर को प्रेम किया? क्या कभी प्रेममय होकर अपने हाथ को चूमा? क्या कभी आपने ख्याल किया कि क्या अदभूत घटित हो रहा है? फिर स्वयं ही जवाब देते हुए कहते हैं कि शायद ही आपमें कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसने अपनी आंखो को प्रेम किया हो। क्या किसी व्यक्ति ने कृतज्ञता प्रकट की कि ऐसा अदभूत घटित हो रहा हैं। अेाशो ने रहस्य से पर्दा सरकाते हुए बताया कि शरीर में सब कुछ स्वतः हो रहा है अैार हमें शरीर के प्रति कृतज्ञता अैार प्रेम नहीं है। उन्होने सुझाव दिया कि हम अपने शरीर के प्रति कृतज्ञ हो जाए। इसका कारण यह बताया गया कि जो व्यक्ति, सर्वप्रथम अपने शरीर के प्रति कृतज्ञ हो गया तो समझो कि वह दूसरो के प्रति भी कृतज्ञ हो सकता है। जो अपने शरीर के प्रति कृतज्ञ नहीं हो सकता .है वह दूसरो के प्रति कैसे कृतज्ञता से लबरेज हो सकता हैं। इस शरीर से प्रेम के झरने निकलते है। यदि हमारा. परिचय अपने झरनो से हो गया तो हम दूसरो के प्रति भी प्रेम से भर सकते हैं।
जब भी हम प्रकृति से कुछ लेते है तब हमारे भीतर कृतज्ञता के भाव का उदगम होना चाहिए। प्रकृति निःशुल्क वायु प्रदान करती हैं। बिना वायु के जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती हैं। हमारा ध्यान इस अेार जाता ही नहीं हैं। प्रकृति ने हमें इतनी सौगाते दी हैं कि हम प्रत्येक पल प्रकृति के प्रति कृतज्ञता अैार धन्यवाद के भाव से भर जायें, तो भी कम हैं। कई संप्रदायों में आर्शीवाद देने वाले के प्रति भी धन्यवाद देने का भी प्रचलन है। जो व्यक्ति, हमें आर्शीवाद देते है, उनका मूल भाव हमारे कल्याण की कामना करना होता हैं। अतः आशीवाद दाता के प्रति भी कृतज्ञता प्रकट करना हमारा पुनीत कर्तव्य है। इस प्रकार कृतज्ञता प्रकट करना सभी धर्मो का अह्रवाहन है। आप विचार करके देखिए कि जब हम धन्यवाद ज्ञापित करते हैं तब हमारा मन कितना हल्का हो जाता हैं। अेाशो ने धन्यवाद के भाव को बहुत अधिक महत्ता प्रदान की है।
कुरआन में कई बार एक वाक्य आता है'’फाबेअययआलाहे रब्बे कोमा तोकज्जेबान। इस वाक्य का शब्दिक अर्थ होता है कि अल्लाह ने हमें इतने उपहार दिए हैं कि हम कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। आयत कहती हैं कि अल्लाह की कौन-कौन सी नेमतो से इंकार करोगें। यह प्यारा शब्द सूरह ए रहमान आयत में आता हैं। यदि हम जीवन पर विचार करे तो हमें मालूम हो जाएगा कि करोडो नेमते इंसान को निःशुल्क उपहार के रुप में प्रदान की गई हैं। यह शब्द प्रत्येक इंसान से उम्मीद करता हैं कि वह अल्लाह की नेमतो का शुक्रिया अदा करे।
आगे जारी है.........
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Nice vlog
यह लेख हमें याद दिलाता है कि खुश रहने के लिए अधिक पाने की नहीं, बल्कि जो है उसकी कदर करने की जरूरत है। कृतज्ञता ही सच्ची समृद्धि है। बहुत गहरा संदेश। 🌿