How did Osho come into my life? (Part-4) (हिंदी अनुवाद - मेरी, जिंदगी में कैसे आए, अेाशो : भाग-4)
- Jun 4, 2025
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Updated: Jun 8, 2025
दिनांक : 04.06.2025

फ्रायड अपने जीवन के अतिंम दिनो में इस नतीजे पर पहॅुचे कि मानव का सुखी होना असंभव की सीमा तक कठिन हैं l
मेरे मन मे भी, दुखो के कारणो को खोजने की जिज्ञासा पैदा हो रही थी। अलग-अलग विचारको को पढने के बाद भी यह नहीं जान पाया कि आखिर जीवन से दुख को विदा कैसे किया जाए? दुख का मूल कारण समझ में नहीं आ रहा था। भारत के सभी हिस्सो में एक कहावत प्रचलित हैं कि अपने गिरेबॅान में झॅाक कर देखो। हमारी दृष्टि गिरेबान को छोडकर सब जगह जाती हैं। अेाशो कहते है कि दुख का कारण हमारे मन में ही हैं। मन के बाहर दुख का कारण खोजने की कोशिश की तो समझ लेना कि गलत रास्ता पकड लिया। दुख का कारण मन के भीतर हैं। अतः दूसरो को दुख देने का विचार भी मन मे लाए तो तुम दुखी हो जाओगे। मन में दूसरो को दुख देने का ख्याल आए तो समझना, हमने दुख के बीज बो दिए। हमारे विचारो से दूसरो को दुख मिलेगा या नहीं? यह तो पक्का नहीं है परंतु हम अवश्य ही दुखी हो जाएगें। अेाशो ने बुद्द के माध्यम से यहॅा तक कह दिया कि यदि तुम आज दुख पा रहे हो तो यह दुख, कल बोए गए बीजो का परिणाम हैं। तुम चाहते हो कि दुख का जीवन में प्रवेश न होने पाए तो आज दुख के बीज मत बोना।
अब मुझे दुख का मूल कारण समझ में आने लगा था। मैने ऐसे ख्यालो को ही दिमाग मे जगह देना बंद कर दिया जो किसी को दुखी करने की आकांक्षा रखते हो। दुख के बादल जीवन से सरकने लगे। मन में शीतलता अनुभव होने लगी। दुखी लोगो के प्रति हमदर्दी और दयाभाव स्वत ही अनुभव में आने लगे l
अेाशो दुख के कारणो की गहराई मे जाते है अैार हमें दुख से निजात दिलवाने एक फार्मूला बताते है। अेाशो कहते है यदि मन में किसी को दुख देने का जरा सा भाव ही आया तो समझ समझ लेना कि तुम दुख के बीज बो रहे हो। इस बीज से जिस वृक्ष पर फल लगेगें, वे फल हमारे ही जीवन में ही गिरेंगें। बीज जिसके मन में होगा फल भी उसी के जीवन में गिरना तय हैं। मन क्रोधित होकर किसी को नुकसान पहॅुचाने की योजना बना रहा हो तो लक्षित को नुकसान पहॅूचे या न पहॅूचे, तुम्हारे जीवन में नुकसान पहॅुचने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी हैं। बुद्द का तो यहॅा तक कहना था कि क्रोधित होना मानव की सबसे बडी बेवकूफी हैं। दूसरे के कसूर के लिए स्वयं को दंडित करना कौनसी समझदारी का परिचायक हैं। दूसरे के गाली देने से हमारा क्रोधित होकर मरने मारने पर उतर आना मानसिक रोग हैं l
अगला अध्याय : अेाशो हमारे विवेक को जागृत करते है।



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