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What Are Emotions Called? (Part - 17) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 17)

  • ayubkhantonk
  • Jan 11
  • 3 min read

Updated: 6 days ago

दिनांक : 11.01.2026

यह अेाशो की मानवता को एक महान देन हैं कि वे सदैव प्रत्येक कृत्य, घटना अैार परिणाम के दोनो पहलुअेा से हमें रुबरु करवाकर हमारे विवेक को झंगझाोडते हैं। फिर अकाटय तर्को अैार बोध कथाअेा के माध्यम से उसके विधायक पक्ष को हमारे सामने रखते है। कई बार तो मैं, आश्चर्य की अतिरेक्ता से भर जाता हूं, जब अेाशो स्वयं अपने जीवन की, किसी घटना से सकारात्मक पक्ष को निकालकर हमारे सम्मुख रखते हैं। महाबलेश्वर के एतिहासिक साधना शिविर में उन्होनें अपने जीवन की जिस घटना का वर्णन किया है, उसे हुबहु लिखने पर ही उसका मर्म समझ में आ सकेगा। अेाशो के शब्दो में-----

‘’ मैं छोटा था अैार मेरे पिता गरीब थे। उन्होनें बडी मुशिकल से अपना घर बनाया। गरीब भी थें अैार नासमझ भी थे क्योंकि कभी उन्होनें मकान नहीं बनाए थे। उन्होंने बडी मुशकिल से एक मकान बनवाया। वह मकान नासमझी से बना होगा। वह बना अैार हम उस मकान में पहुंचे भी नहीं थे अैार वह पहली बरसात में गिर गया। हम छोटे थे अैार बहुत दुखी हुए। वें गांव के बाहर थे। उनको मैनें खबर भेजी कि मकान तो गिर गया। हमें बडी आशाए थी कि हम उस मकान में निवास करने जाएगें । वे आशाए धूमिल हो गई । वे आए अैार उन्होनें गांव में लडडू बांटे। उन्होनें कहाः’’-परमात्मा का धन्यवाद। अगर आठ दिन बाद मकान गिरता, तो मेरा एक भी बच्चा नहीं जीवित नहीं बचता।'' हम आठ दिन बाद ही उस मकान में जानें वाले थ्रे। वे उसके बाद जिंदगी भर इस बात से खुश होते रहे कि मकान आठ दिन पहले गिर गया। आठ दिन बाद गिरता तो बहुत मुश्किल हो जाती। यूं भी जिंदगी को देखा जा सकता हैं। जो ऐसे जिंदगी को देखता हैं, उसके जीवन में बडी प्रसन्नता का उदभव होता हैं। आप जिंदगी को कैसे देखते हैं, इस पर सब कुछ निर्भर करता हैं। जिंदगी में कुछ भी नहीं हैं, आपके देखने पर,आपका एटिटयूड,अपकी पकड, आपकी दृष्टि सब कुछ बनाती अैार बिगाडती हैं। '

आनंदमग्नता अैार प्रसन्नता का जीवन में तब उदभव होता है जब हमारा जिंदगी को देखने का दृष्टिकोण सकारात्मक हो जाए। हम परिवारजनो, मित्रो अैार परिचित लोगो की विशेषताअेा को किस नजरिये से देखते है। वह नजरिया सकारात्मक हो जाए तो हमारी भावनाऍ भी शुद्द हो सकती है। प्रयास तो हमे ही करना होगा। साधना तो हमें ही करनी होगी। जैसे हमारा एक परिचित व्यक्ति नशा करने का आदि हो गया हैं लेकिन वह अपने ऑफिस में कभी भी नशा करके नहीं जाता है। ऑफिस का काम पूरी लग्न अैार इमानदारी के साथ निष्पादित करता हैं। अब मित्र मंडली में उसके व्यक्तित्व पर दो तरह से चर्चा हो सकती हैं। प्रथम--मेरा परिचित कर्तव्य परायण अैार निष्ठावान है। वह थोडा नशे का शोकिन है लेकिन उसके इस शैाक से उसकी कार्यनिष्ठा, लगन अैार ईमानदारी प्रभावित नहीं होती हैं। दितीय-- यह भी कहा जा सकता हैं कि वह नशेबाज है, उसमें चाहे कितनी ही लगन अैार निष्ठा हो, वह कोई मायने नहीं रखती हैं।

व्यक्तित्व की चर्चा का प्रथम तरीका विधायक अैार सकारात्मक हैं। यह तरीका मन में प्रसन्नता उत्पन्न करता हैं। दितीय तरीका नकारात्मकता अैार खिन्नता उत्पन्न करता हैं। हमें जिंदगी को देखने का ढंग विधायक रखना होगा। इस ढंग से प्रसन्नता का आगमन होता है अैार जीवन से बोझ धीरे-धीरे कम होने लगता हैं। जब बोझ कम होगा तो मस्तिष्क हल्का होगा अैार हमारी जीवन उर्जा व्यर्थ के कार्यो में खर्च नहीं होगी।

आगे जारी है......... 

 
 
 

1 Comment


Sikandar Khan Niazi
Sikandar Khan Niazi
Jan 13

अच्छा लिखा है

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नमस्ते, मैं अय्यूब आनंद
आपका स्वागत करना मेरे लिए प्रसन्नता की बात है।

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