What Are Emotions Called? (Part - 14) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 14)
- Nov 30, 2025
- 3 min read
Updated: Dec 21, 2025
दिनांक : 30.11.2025

स्वंय के भीतर करुणा के केद्र को विकसित करने के लिए अभ्यास तो हमें ही करना होगा। अेाशो ने एक प्रयोग इजाद किया हैं। इस प्रयोग से हमारा करुणा केंद्र तो विकसित होगा ही साथ ही साथ आंगंतुक के व्यक्तित्व में बदलाव नजर आएगा। जब भी कोई व्यकित मिलने आए तो हम स्वंय में लीन होकर, एक शांति की अनुभूति करते हुए बैठ जाए। जब वह शख्स हमारे चेंबर में प्रवेश करे तब मन में उसके लिए शांति का प्रबल भाव करे। उसके जीवन में शांति के आगमन की कामना करें। हमें बोलकर ऐसी कामना करने की आवश्यकता नहीं हैं। बल्कि मन को एकाग्रचित करके सम्पूर्ण्र शक्ति के साथ ऐसा सोचना हैं। ऐसा भाव करना हैं। अेाशो कहते हैं कि अचानक आप उस आगंतुक में एक परिवर्तन महसूस करेंगे। उसमें शांति उतरनी प्रांरभ हो जाएगी। वह शख्स पहले से भिन्न नजर आएगा। उसका आपसे मिलने की घटना प्रीतिकर हो जाएगी। उस आगंतुक के मन मे हमारे प्रति सहयोग करने की ईच्छा जागृत होने लगेगी।
इस छोटे से प्रयोग को मैने कई बार प्रयुक्त किया।
हर बार आशानुकूल परिणोम हासिल हुए।
बात गले नहीं उतर रही है तो मेरे जीवन की यह घटना पढिए।
अभी एक वर्ष पहले मेरे मित्र के पुत्र का विवाह था। उसके एक ही पुत्र संतान थी, पुत्री नहीं थी। उसने विवाह की तिथि तय होते ही मुझे सूचित कर दिया था कि मुझे अेाफिस में छुटटी अप्लाइ कर देनी चाहिए। मैने सोचा कि अभी विवाह में तीन महिने है। आराम से छुटटी के लिए अप्लाइ कर देगें। फिर काम में मशरुफ हो गया अैार छुटटी अप्लाइ करना भूल गया। मित्र ने पंद्रह दिन बाद फोन करके मुझे फिर याद दिलाया तो मैने उसको कह दिया की दो दिन की छुटटी मंजूर हो गई हैं।
मित्र, बहुत खुश हुआ। फिर मैंने एपलाइ किया अैार मुझे दो दिन की छुटटी मिल गई। लेकिन इतफाक से, मैं शादी में शरीक नही हो पाया। हुआ यूं कि उन दो दिनो में बडे अफसरो का अचानक दौरा हो गया। छुटटी मंजूर होने के बावजूद भी मुझे आफिस जाकर इंतजाम करने पडे। शादी में शरीक नहीं होने के कारण मित्र अैार उसका परिवार नाराज हो गया। मुझे अन्य परिजनो से समाचार मिल चुके थे कि सभी लोग बहुत नाराज हैं। मै चितिंत था कि उन लोगो को क्या जवाब दूॅगा। बचपन के मित्र की नाराजगी अच्छी नहीं मानी जाती है।
मेरी चिंता अैार बैचेनी उस वक्त अैार बढ गई, जब मुझे समाचार मिला कि मित्र अैार उसका परिवार रविवार को मिलने के लिए मेरे घर आ रहा हैं। मेरी चिंताए बढनें लगी। सही कहा जाए तो मैं किकर्तव्यविमूठता की स्थिति में आ गया था। फिर मुझे अैाशो द्रारा इजाद किए गए, उस ध्यान का ख्याल आया कि आगंतुक के आने पर मन में प्रबल भाव करना हैं कि परमात्मा आगंतुक के ह्रदय में शांति की लहर उत्पन्न कर दे। आगंतुको का चित्त शांत हो। मैंने पूरे दिन एसे भाव करे । मैं इस छोटे से ध्यान प्रयोग के परिणामों के प्रति आंशकित था। सोच रहा था कि कैसे अपनी स्थ्रिति को स्पष्ट कर पाउॅगा। मै उन्हे वास्तविकता बयान कर पाउॅगा या नही?
वे पाॅच लोग थे। उनके हाथो में मिठाई के डिब्बे थे। सभी मुस्कुरा रहे थे। पांचो लोग मुझसे गले मिले। मैं उनके व्यवहार से आशचर्यचकित था। मित्र बोले--
‘’हमें हकीकत मालूम हो चुकी हैं। अब अचानक बडे अफसर आ धमके तो उनका इंतजाम तो करना ही पडता है। हमने आपकी हाजरी मान ली हैं।'’
‘’हाॅ। मैने बहुत कोशिश करी कि मै किसी तरह शादी के दिन पहुॅच जाउ। लेकिन मेरी कोशिश कामयाब नहीं हो पाई। मैने वाटसएप पर फक्शन के फोटो देखे थे। अच्छा फक्शन था।'’
फिर मैने मित्र की प्रतिक्रिया जाननी चाही।
मित्र के परिजन एक साथ बोल पडे--- ’’हॅा। फंक्शन बहुत शानदार हुआ। एक बार तो मौसम ने सभी को डरा दिया था। फिर मौसम साफ हो गया। परमात्मा की कृपा से सब अच्छा हो गया।
फिर वे चाय नाश्ता करके राजी खुशी लौट गए।
इस प्रकार, मात्र, भाव करने से आगंतुक का मनोमस्तिष्क शांत अैार सकारात्मक हो सकता हैं। यह छोटा सा ध्यान प्रयोग जीवन में आनें वाली समस्याअेा को हल कर देता हैं। मेरे अनुभव पर आप यकीन नहीं करे। आप इस छोटी सी विधि का स्वयं प्रयोग करे अैार परिणामो से अवगत करावें। परिणाम सकारात्मक ही होगें। यदि आप ने पूरे मनोयोग के साथ ऐसे भाव अपने ह्रदय की गहराइयों से किए हो तो सकारात्मक परिणाम का आना संभव हैं l
आगे जारी है.........



विस्मयकारी और आलौकिक एक्सपेरिमेंट
Good
Nice