What Are Emotions Called? (Part - 13) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 13)
- ayubkhantonk
- Nov 16
- 3 min read
Updated: Nov 17
दिनांक : 16.11.2025

मेरे फोन पर उस व्यक्ति नें गुड मोर्निंग का मैसेज भेजा। पहले तो मुझे यकीन नहीं हुआ कि यह मैसेज उसी शख्स का है। लेकिन आई0डी0 कॉलर ने सच्चाई की पुष्टि कर दी। तनाव का ग्राफ शून्य के स्तर पर आ गया। सोहलवें दिन की रात्रि को फिर मैने प्रेम और मैत्री का संदेश भेजा। सत्तरवे दिन फिर गुड मोर्निंग का मैसेज पढनें को मिला। एक संदेश भी लिखा था कि क्या हम आज शाम निखिल की शादी के फंक्शन में मिल सकते हैं? अब तो मेरा विश्वास यकीन में तब्दील हो गया। अब कोई शक सुबाह नहीं रह गया था कि यह सब मैत्री के संदेशो का ही परिणाम हैं। शाम को शादी के फंक्शन में एक ही टेबिल पर भोजन किया। कई मुद्दों पर खुलकर बात हुई। निष्कर्ष निकला की संवादहीनता से ऐसे हालात पैदा हुए। मैत्री के संदेशों की तंरगो ने उनके हृदय की वीणा को झंकृत कर दिया। उस वीणा के सुरो से संवादहीनता का पटापेक्ष हो गया। चित्त शांत हुआ।
ऐसे होता है, मैत्री संदेशो का परिणाम।
आप भी प्रयोग करेगें तो आपके निराशा हाथ नहीं लगेगी।
सकारात्मक परिणाम आपकी उर्जा को नष्ट नहीं होने देंगे।
ऐसे संदेश अैार अैार भावो के मूल में कोई प्रयोजन नहीं होना चाहिए। यह सब कार्य अप्रयोजन से हो। दूसरे शब्दो में मैत्री भाव के संदेश, सिर्फ अपने आनंद के लिए भेजे। इन संदेशो के नियिमत प्रवाह से हमारा मैत्री केंद्र मजबूत होगा। यदि दिन में एक ही कार्य अकारण करे तो मैत्री भाव प्रगाढ होने के साथ-साथ आनंद की भी अनुभूति होगी। एक व्यक्ति को प्रेम करना अैार उसके बदले कुछ नहीं चाहना। अेाशेा की दृष्टि में यह मंहगा सौदा नहीं है। प्रेम प्रकट करने के प्रति उत्सुकता उत्पन्न होने से प्रेममय स्थिति के द्वार खुलने लगते हैं। प्रेममय हो जाना स्वर्ग तुल्य हैं।
सदगुरु अेाशो ने भावनाअेा को शुद्ध करने का दूसरा मंत्र दिया है-करुणा ।
करुणा को हम दया के समकक्ष भी मान सकते हैं। करुणा भी ह्रदय में स्वतः उत्पन्न हो, यह आवश्यक नहीं हैं। कई ऐसे साधक भी है। जिनके ह्रदय में करुणा के तार स्वत झंकृत होते हैं। लेकिन ऐसे लोगो की संख्या अगुंलियों पर गिनी जा सकती हैं। अंधिकांश लोगो के ह्रदय की वीणा में तार तो हैं लकिन वे इन तारो से अनभिज्ञ हैं। उन्हे पता ही नहीं है कि परमात्मा ने जन्म के साथ ही हमारे भीतर करुणा के तत्व डाल दिए थे। ऐसे लोगो के ह्रदय में वीणा के तारो को सजग अैार विकसित करने हेतु प्रकृति प्रदत्त, करुणा केंद्र को झंकृत करने के लिए उपाय करने होगें।
हम सब जानते है कि जीवन क्षणभंगुर हैं। लेकिन इसे स्वीकार करना कठिन है। यहां मानव जीवन ही नही प्रत्येक वस्तु भी क्षणभंगुर हैं। यदि हमारे आसपास रहने वाले लोगो के बारे में हमें यह बोध हो जाए कि जो लोग आज हमें नजर आ रहे हैं, हो सकता हैं कि आज का दिन उनके जीवन का अंतिम दिन हो ? यदि ऐसा बाेध, प्रबल हो जाॅए तो प्रत्येक मानव के प्रति मन में स्वतः ही दयाभाव का उदय होना आरंभ हो जाएगा। इसी दयाभाव को अेाशो करुणा कहते हैं।
अेाशो एक बगीचे में गए। वहां फूलो की खूबसूरती मनमोहक थी। बडे प्रेम भाव से अेाशो ने प्रकृति के इन उपहारो को निहारा । लेकिन दूसरे ही पल उनके मस्तिष्क में विचार आया कि इतने खुबसूरत फूल संध्यां के आगमन पर मुरझा जाएगें। यह विचार आते ही फूलो के प्रति करुणा भाव उदय हो गया। यह जानते हुए कि जीवन क्षणभंगुर है फिर भी इतनी वासना, द्वेष अैार पीड़ाये क्यो उत्पन्न हो रही हैं? इसका एक मात्र कारण है कि हमारें हृदय में स्थित करुणा केंद विकसित नहीं हुआ है। यदि करुणा का केंद्र विकसित हो जाए तो जीवन मे मानसिक रोगो से निजात मिल सकती हैं।
आगे जारी है.........
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Nice