top of page

What Are Emotions Called? (Part - 12) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 12)

  • ayubkhantonk
  • Nov 2
  • 3 min read

Updated: Nov 17

दिनांक : 02.11.2025

ree

ओशो तो यहॉ तक कहते हैं कि यदि कोई चंद्रमा की चांदनी में कुछ क्षण मौन होकर बैठ जाए, तो चाॅदनी से भी मन में मैत्री का केंद्र विकसित हेाने में सहयोग मिल सकता हैं।। चंद्रमा की चांदनी के प्रति अहोभाव प्रकट करने से प्रेम व मैत्री के केद्र को विकसित होने में मदद मिल सकती है। महाबलेश्वर के शिविर में ओशो ने रहस्य उजागर किया कि हमारे चारो ओर मैत्री के अनेकानेक अवसर उपलब्ध है। यह प्रकृति, अदभूत रहस्यो से लबालब हैं। जीवन में जब भी प्रेममय होने का अवसर मिले, उसका सदुपयोग कीजिए। प्रेम के अवसर को खाली नहीं जाने दे। जब भी प्रेम का अवसर उपलब्ध हो, समझे कि यह अवसर परमात्मा की अनुकंपा से आया है। परमात्मा के प्रति अहोभाव से भर जाए। प्रेम का अवसर उत्पन्न करना होगा। जैसे ही झरोखे से प्रेम के मेघाे पर दृष्टि पडे, उन्हे बरसने का अनुरोध करे।

जैसे, आप रास्ते गुजर रहे हैं। रास्ते में कोई पत्थर नजर आया। उस पत्थर को वहॉ से हटाकर, ऐसे स्थान पर रख दे, जहॉ किसी राहगीर को चोट लगने की संभाावना न रहें। यह अति सरल साधना हैं। किसी राहगीर को पत्थर से होने वाले नुकसान से बचाकर हमने प्रेम का एक कृत्य संपंन कर दिया। रोजमर्रा के कृत्यो में लोगो से हाथ मिलाना एक सामान्य आदत हैं। इस आदत से भी मैत्री और प्रेम को साधा जा सकता हैं। स्वयं को प्रेम से लबरेज कर किसी के प्रति प्रेमपूर्ण होकर हाथ मिलाया जाए तो समझ लीजिए कि आप प्रेम के केंद्र को विकसित करने की दिशा में अग्रसर हो रहे है।

ऐसा बार-बार करने से इस केंद्र को विकसित किया जा सकता हैं। इतना ही ख्याल जहन में रखना हैं कि इन कृत्यो के परिणाम की हमारे भीतर कोई आंकाक्षा नहीं रहे। एसे कृत्य हम अकारण कर रहे है। हमारे मन मे इन कृत्यो के फल की अभिलाषा नहीं रहें। यह कृत्य तो हम भाव-शुद्द‍ि के प्रथम चरण के लिए कर रहे है। जब यह भावना विकसित हो जाएगी कि हमारे कृत्य सामने वाले की प्रतिक्रिया से कोई संबंध नही रखते है तब इस केंद्र का विकास होगा। हमारे सभी कृत्य केवल अैार केवल, आनंद प्राप्ति के लिए हो जाए तो स्वर्ग पृथ्वी पर उतरने में अधिक समय नहीं लगेगा।

ओशो ने तो दावा किया है कि ऐसी निरतंर साधना से आप उनके प्रति भी मैत्रीपूर्ण हो जाएगें, जिनके मन में आपके प्रति शत्रुता के बीज पडे हुए हैं। ऐसी स्थिति भी आ सकती हैं कि हम उदघोषित कर सके कि मेरी किसी से कोई शत्रुता नहीं है। सभी से मेरी मैत्री हैं। इसके बाद जीवन के आनंद को देखिए। झरने फूट पडेगें, आनंद, प्रेम और मैत्री के। मौसम की बारिश भी यह अहसास देगी कि प्रकृति अमृत बरसा रही हैं। सुबह की शबनम की बूॅदे सुखद अहसास देगी। हमारा चलना, उठना बैठना, बोलना अैार मौन रहना भी आनंददायक होगा।

इस प्रकार हम अपने भावो की शुद्द‍ि के उपाय कर सकते है।

भावनाऍ तरंगित होकर दूसरे व्यक्ति तक पहुॅचती हैं। हम दूसरे लोगो के प्रति मन में जो भाव रखते हैं, वे तरंगो पर सवार होकर संबंधित व्यक्ति तक पहॅुच जाते हैं। भावो का गमन अवश्य होता है। पूरे विश्व के वैज्ञानिक भावों के तरंगित होने के नियम पर सहमत हैं। मै किसी नियम या वैज्ञानिको के निष्कर्ष के आधार पर नहीं कह रहा हॅू। मै, मेरे व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर कह रहा हूॅ कि शांत चित्त से प्रवाहित किए गए भाव संदेश शुभ परिणाम लाते हैं। चित्त को शांत करते हैं। वे हमारे भावो की शुद्दि का प्रबल माध्यम बन सकते हैं।

मेरा व्यक्तिगत अनुभव देखिए।

एक व्यक्ति के प्रति मेरे मन में कई कारणो से शत्रुता के भाव विकसित होते गए। हमारे बीच कोई मूलभूत विवाद नहीं था। बस समझ की कमी के कारण पहले तो संवादहीनता की स्थिति उत्पन्न हुई फिर एक घटना के तंतु दूसरी घटना से संयोगवसात जुडते चले गए। अकारण उत्पन्न हुए मामले से मुझे बैचेनी होनें लगी। मुझे लगता की इस शत्रुतापूर्ण स्थिति चित्त में अशांति के कीटाणु प्रविष्ट होने लग गए है। इन कीटाणुअेा ने उद्दीग्नता का वेग बढा दिया हैं। देरे सवेर, शत्रुता का भाव दिमाग में आ ही जाता था। इन मनोभावो से बाहर निकलने की छटफटाहट के चलते एकाग्रचित्ता प्रभावित हो रही थी। जब हालात कठिन होने लगे तो अेाशेा साहित्य याद आया।

मुझे याद आया कि मैत्री और प्रेम, इस शत्रुता के झझावात के वेग को कम कर सकते है। मै प्रत्येक रात्रि को छत पर चला जाता और उस व्यक्ति को प्रेम और मैत्री के संदेश भेजने लगा। धीरे-धीरे मन हल्का होना शुरु हो गया। मुझे ऐसा प्रतीत होनें लगा कि सिर से बोझ कम हो रहा हैं। यह प्रक्रिया पंद्रह दिन निरंतर चलती रही। तनाव का ग्राफ तो दिन-प्रतिदिन नीचे आ ही रहा था ।

एक चमत्कारिक घटना घटित हो गई।

आगे जारी है......... 

 
 
 

2 Comments


Bhag Chand Jat
Bhag Chand Jat
Nov 06

सच है, जब हम बिना अपेक्षा के प्रेम करते हैं, तो भीतर का बोझ हल्का हो जाता है।

Like

Sikandar Khan Niazi
Sikandar Khan Niazi
Nov 02

Niceeee

Like

About Me

WhatsApp Image 2025-..._imresizer.jpg

नमस्ते, मैं अय्यूब आनंद
आपका स्वागत करना मेरे लिए प्रसन्नता की बात है।

Osho the Great

Posts Archive

Keep Your Friends
Close & My Posts Closer.

"मुझे एक प्रार्थना भेजें,
और मैं आपको एक प्रार्थना वापस भेजूंगा।"

  • Twitter
  • Facebook
  • Instagram

Contact us

© 2035 by Ayub Khan Powered and secured by Wix

bottom of page