What Are Emotions Called? (Part - 20) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 20)
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दिनांक : 22.02.2026

अेाशेा, इस बोध् कथा से संदेश देना चाहते है कि दुनिया में ऐसी विभूतिया भी हुई है जो लोगो को आनंद बाॅटती हैं। वे अपने हास्य से हमें प्रेरित करते हैं कि हम भी इस तरह से जिंदगी जी सकते हैं। जब वह साधु ताजिंदगी हॅसाकर लोगो को उदासी अैार पीडा के घेरे से बाहर निकालकर, लोगो को उत्साह का माहोल दे सकता है तो हम भी तो ऐसा कर सकते है। बस, समझ अैार बोध की बात हैं। ऐसा किया जाना असंभव नहीं हैं। मोबाइल क्रांति के इस युग में इस क्रॉति के सदुपयोग अैार दुरुपयोग दोनो हो रहे हैं। मुझे समाचार पत्रो अैार चिकित्सक मित्रो से ज्ञात हुआ कि प्रत्येक दिन आधा घंटे तक जोर जोर से हॅसने से रक्तचाप स्थिर रह सकता है।
मेरी माता जी गाॅव में रहती है। मैं जयपुर में रहता हूॅ। मै अैार माता जी उच्च रक्तचाप से पीडित थे। दवा भी ले रहे थे लेकिन कभी कभी चिंता या थकान से रक्तचाप बढ जाया करता था। मैने यू ट्रयूब पर लाफटर शो देखे। जिन लोगो ने लाफटर क्लब की सदस्यता ले रखी थी, उनके साक्षात्कार देखे। कॅालोनी में रहने वाले क्लब के सदस्यों से मुलाकात कर, उनके अनुभव जानें। उन लोगो का भी यही अनुभव रहा कि जबसे उन्होने हास्य क्लब की सदस्यता ली है तब से वें स्वंय को प्रसन्नचित्त महसूस कर रहे हैं। उनका यह भी अनुभव था कि पूरी ताकत से घर में हॅसना संभव नहीं है। तेज आवाज के कारण घर के सदस्यों अैार पडोसियो को कठिनाई का सामना करना पडता हैं। इसलिए वे हास्य विशेषज्ञो द्वारा सावर्जनिक पार्को में स्थाापित हास्य क्लबो में जाने लगे। वहाॅ समूह में हॅसने पर किसी को तकलीफ भी नही होती है। हास्य विशेषज्ञ अपने एक घंटे के कार्यक्रम में विभिन्न क्रियाकलापो के माध्यम से हॅसाने का प्रयास करते है। समूह मे सब लोग उनका अनुसरण करते है। इस तरह सुबह प्रकृति के सानिध्य में आनंद उत्सव के एक घटे के कार्यक्रम के बाद रक्तचाप अैार मानसिक स्थिति स्थिर हो जाती है।
मेरे अैार माताजी के उच्च रक्तचाप की बीमारी थी। अब मैं हास्य विशेषज्ञो के टिप्स समझ गया था। माताजी को हास्य क्लबो के वीडियों दिखाए अैार उन्हे आश्वस्त किया कि सुबह पौधेा के पास बैठकर हॅसने से उच्च रक्तचाप सामान्य स्तर पर आ सकता है। उनके जीवन में यह पहला अनुभव था। मोबाइल का चार्ज बात करने पर नहीं, समय के हिसाब से नियत हो चुका था। अर्थात एक माह में बात करो या मत करो, रिचार्ज तो कराना ही पडेगा। रोज एक घंटे बात करो तो भी एक माह बाद ही रिचार्ज कराना होता हैं।
मोबाइल कंपनियो की इस योजना का हमने लाभ उठाया। मैने मोबाइल स्थापित करने वाले एक फीट उॅचे दो स्टेंड खरीदे। एक माता को दिया अैार एक मेरे पास रख लिया। मैनें, मेरा फोन स्टेंड में फिट किया अैार माता जी ने भी अपना मोबाइल, अपने स्टेंड पर फिट कर लिया। हम दोनो ने अपने-अपने मोबाइलो के स्पीकर ऑन कर दिए। अब मैं सवेरे सेव बनाते हुए, विभिन्न प्रकार की हास्य कथाए मोबाइल पर सुनाने लगा तो माताजी को हॅसी आने लगी। वह धीरे से हॅसती तो मै उनको कहता कि यह तो बीमार आदमी की हॅसी है। जवान आदमियों की भाातिं खुल कर हॅसो। फिर मैं उन्हे खुलकर हॅसकर बताता अैार वे भी पूरा जोर लगाकर हॅसने का प्रयास करने लगी। स्पीकर पर हॅास्य वार्ता का लाभ यह था कि इस दैारान मै, सेव बनाने अैार दिनचर्या के सामान्य कार्य भी आसानी से करता रहता था। कहने का अर्थ यह हैं कि एक घंटे के इस कार्यक्रम के लिए अलग से समय निकालने की जरुरत नहीं रहती थी। चार सालो से मोबाइल पर हमारा यह कार्यक्रम निरंतर चालू हैं। बिना किसी अवकाश के। मेरा अैार माताजी का रक्तचाप अब सामान्य है। मस्तिष्क, शांत रहता है। माताजी को वृदावस्था के अवसाद से भी धीरे धीरे मुक्ति मिल रही हैं।
आगे जारी है.........
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