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विचारो के कैसे पाक-साफ करे? भाग-8

  • 3 days ago
  • 2 min read

दिनांक: 28.06.2026

सदपुरुषो के अस्तित्व की लंबे समय से हर स्थान पर उपस्थिति रही हैं। ऐसा कभी नही हुआ कि पृथ्वी के किसी भूभाग पर सदपुरुष पैदा होने की परंपरा खंडित हुई हो। इनका सानिध्य, इनके वचन, इनकी दिनचर्या अैार भाव भंगीमा, हमें सत्यम, शिवम, सुंदरम का पाठ पढाने में सक्षम हैं। ऐसे लोगो के संपर्क में आने का प्रयास करे। उनकी दिनचर्या अैार भाव-भंगिमा को गहराई से पढने की कोशिश करें।

मुस्लिम भी मानसिक अैार हार्दिक विचारो को बहुत तरजीह देते हैं। इस्लाम में चिंतन की शैली को इबादत के समकक्ष माना गया हैं। आाध्यात्मिकता अैार धार्मिकता को भी बेहतर मानसिक स्वास्थय से संयुक्त किया गया हैं। यकीन वेबसाइट के अनुसार विचारो की शुद्दता हेतु ध्यान, -मुराकबा, पश्चाताप-तैाबा अैार अपने चरित्र को पवित्र करने हेतु प्रयास करने चाहिए।

मनोवैज्ञानिक भी स्वीकार कर चुके हैं कि किसी भी स्थिति में उत्पन्न होनें वाला विचार अपना स्थायी अस्तित्व रखता हैं। विचार का क्षय नहीं होता हैं। प्रत्येक विचार का निश्चित परिणाम अवश्य होता है। वह एक संस्कार के रुप मे संचित रहता हैं। सकारात्मकता के पथ पर गति करने हेतु आवश्यक है कि सदपुरुषो के सानिध्य में रहने का प्रयास करे। मनुष्य के जीवन में घटित होनें वाली घटनाऐ उसके मन में उत्पन्न होनें वाले विचारो का प्रतिफलन हैं। यह भी स्वीकृत तथ्य हैं कि मस्तिष्क से निकले विचारो का हमारे शरीर, स्वास्थय पर इस कदर असर पडता हैं कि यदि वे विचार नकारात्मक हो तो विवेक को भ्रमित करने की क्षमता रखते हैं। इनके असर से हमारे कर्म भी अछूते नहीं रह सकते। कर्मो पर भी अशुद्दता की चादर लिपट सकती हैं। अशुभ विचारो से मन की स्थिरता प्रभावित होती हैं। जब मन की स्थिरता प्रभावित होती हैं तब विवेक शून्यता प्रकट होने लगती हैं। यदि विवेक का स्तर शून्यता पर आ गया तो समझ ले कि परमात्मा ने पशु अैार मानव के मध्य जो अन्तराल रखा था, वह समाप्ति के कगार पर हैं।

...............अध्याय समाप्त..................

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