top of page

ओशेा ने बताए- आनंदित जीवन के सूत्र (भाग-3)

Jul 19
3 min read

दिनांक : 19.07.2026

इस नारकीय जीवन के मार्ग पर चलने वालो का यही हश्र होता हैं। 

हमारे चिंतन का दायरा हमारी संतान को प्रभावित करता है। यह दुर्भाग्य हैं कि यहॅा प्रत्येक कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। लेकिन बच्चों के पालन-पोषण का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता। न तो बालमन को प्रभावित करने वाले कारको का मनोविज्ञान समझाया जाता है और न ही उनके विवेक को जागृत करने के उपाय सिखाए जाते हैं। नतीजा यह होता हैं कि बालक को नियंत्रण में रखने के लिए अतार्किक ढंग अपनाए जाकर उसकी स्वतंत्रता का हनन कर दिया जाता हैं। होना यह चाहिए था कि किन्ही कारणो से हमारे अभिभावक हमारे विवेक को जागृत करने मे सहयोग नही दे पाए थे लेकिन हमे तो अपने बच्चो को यह अवसर उपलब्ध करवाना चाहिए था।

ओशो कहते है कि प्रत्येक बच्चा अदितीय होता हैं। उसके जैसा बच्चा न तो पहले कभी हुआ और ना ही भविष्य में होगा। वह जो बनने के लिए पैदा हुआ है उसे वही बनने देने का मार्ग प्रशस्त किया जाता है तो उसकी खिलावट बेनजीर होगी। वह सुख और आनंदपूर्ण जीवन जी सकता हैं। बालक की दिलचस्पी चित्रकार बनने में है। वह अच्छे चित्र केनवास पर उकेर रहा है और हम उसे पुलिस अधिकारी बनाने के लिए बेताब है। हम उसे पुलिस अधिकारी इसलिए नहीं बनाना चाहते कि पुलिस अधिकारी का जीवन शांत और आनंदित होता है। बल्कि उसे पुलिस अधिकारी बनाकर हम अपने अंहकार को और हवा देना चाहते हैं। समाज को अहसास कराना चाहते हैं कि हमे हल्के में मत ले लेना। हमारा पुत्र भी पुलिस अधिकारी हैं। समाज में वर्चस्व की दैाड में युवा को उसके स्वभाव और रुचि के प्रतिकूल जीवन जीने के लिए मजबूर होना पडता हैं। इस झूटी शान के मंच पर युवा का स्वभाव कोइ मायने नही रखता हैं। 

आपने आमिर खान द्रारा अभिनित '’थ्री इडियट'’ फिल्म देखी होगी। यह फिल्म अभिभावको के लिए एक सबक हैं। कैसे एक युवा, फोटोग्राफर बनकर प्रकृति को अपने कैमरे मे कैद करना चाहता है। वह इसे ही अपनी गुजर-बसर का जरिया बनाना चाहता है। उसके माता-पिता अपनी महत्वकांक्षाओं की पूर्ति के लिए उसे इंजिनियर बनाना चाहते हैं। किस तरह उस युवा का मनोबल टूटता है। वह कैसी बैचेनी महसूस करता है। इसे हमने पर्दे पर देखा। हकीकत भी इससे अलग नहीं हैं। शिक्षा नगरी कोटा के छात्रो में महत्वाकांक्षा और परिजनो का इतना दबाव बन रहा है कि छात्र अवसाद से ग्रसित होकर आत्म हत्या करने पर मजबूर हो रहे हैं। हमारे सामाजिक परिवेश ने जीवन के लक्ष्य इतने बडे निर्धारित कर दिए हैं कि उन लक्ष्यों तक पहुँचना दुश्कर होता जा रहा हैं। इन लक्ष्यो में व्यक्तिगत ईच्छा का कोई स्थान नहीं हैं। डॉक्टर इसलिए नही बनना हैं कि रोगियो की सेवा करनी है। बल्कि डॉक्टर इसलिए बनना हैं कि परिजन चाहते है। डॉक्टर इसलिए बनना हैं कि पडौसी का लडका कम्पाउंडर बन गया हैं। पडौसी को दिखाना हैं कि तुम्हारी संतान तो कंम्पाउंडर ही बन पाई। देखो मेरा पुत्र-पुत्री डॉक्टर बन गए हैं।

एक दूसरो को नीचा दिखाने में बच्चो को ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। वैवाहिक रिश्ते भी इस अस्‍वस्‍थ प्रतियोगिता एक वजह हैं। प्रत्येक परिजन यह चाहता हैं कि उसकी संतान का वैवाहिक संबंध संपंन परिवार में हो जाए। इस तथ्य पर गौर ही नहीं किया जाता कि जिस संपंन परिवार के साथ हम वैवाहिक रिश्ता जोडने जा रहे है, उनमें मानवीयता का गुण विद्यमान हैं या नही? उस तथाकथित संपन परिवार में उनकी पुत्री को उसके स्वभाव के मुताबिक जीवन जीने की स्वतंत्रता होगी या नही? क्या उस परिवार में पुत्री को आनंद हासिल हो पाएगा या नही? बस एक अंधी दौड शुरु हो गई हैं। यही वजह है कि पति-पत्नी जल्द ही पारिवारिक न्यायालय से विवाह को तोडने की गुहार करने चले जा रहे है। मैने परिवार न्यायालय में एक वर्ष तक न्यायाधीश के रुप में कार्य किया। मैने अनुभव किया कि रिश्ता करने से पूर्व बच्चो के स्वभाव को नजरअंदाज किया जाता हैं। विपरित स्वभाव के लोग विवाह की डोर में लंबे समय तक बंध कर नहीं रह सकते। उनकी अलग-अलग महत्वाकांक्षाऍ विवाद का आधारभूत कारण बन जाती हैं। 

जारी है ...................

पिछला ब्लॉग / भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे......... 

अगला ब्लॉग / भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे......... 

 
 
 

1 Comment


Bhag Chand Jat
Bhag Chand Jat
Aug 04

"बहुत विचारोत्तेजक लेख। सबसे प्रभावशाली बात यह लगी कि हर बच्चा अपनी रुचि, स्वभाव और क्षमता के साथ जन्म लेता है। यदि माता-पिता केवल अपनी अधूरी महत्वाकांक्षाएँ पूरी करने के लिए बच्चों पर करियर थोपते हैं, तो इससे उनका आत्मविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। हालांकि मार्गदर्शन देना भी अभिभावकों की जिम्मेदारी है, इसलिए स्वतंत्रता और उचित दिशा—दोनों का संतुलन आवश्यक है। समाज में दिखावे और तुलना की प्रवृत्ति कम होगी, तभी बच्चे वास्तव में आनंदपूर्ण और सार्थक जीवन जी पाएँगे।"

Like

About Me

WhatsApp Image 2025-..._imresizer.jpg

नमस्ते, मैं अय्यूब आनंद
आपका स्वागत करना मेरे लिए प्रसन्नता की बात है।

Osho the Great

Posts Archive

Keep Your Friends
Close & My Posts Closer.

"मुझे एक प्रार्थना भेजें,
और मैं आपको एक प्रार्थना वापस भेजूंगा।"

  • Twitter
  • Facebook
  • Instagram

Contact us

© 2035 by Ayub Khan Powered and secured by Wix

bottom of page