top of page

What Are Emotions Called? (Part - 22) (हिंदी अनुवाद- भावनाऍ किसे कहते है? भाग - 22)

  • 2 days ago
  • 4 min read

दिनांक : 22.03.2026

इस प्रकार पाॅच-छः दिन अकारण किसी को परेशान करने में उसे आनंद आता था। कभी गॉव का कोई किसान किसी मजबुरी में बिजली के पोल पर आंकुडिया डालकर अवैध बिजली ले रहा होता तो वह फोटो खींचकर, बिजली विभाग को भेज देता। गरीब किसान पर बिजली चोरी का केस दर्ज करवा देता। बिजली विभाग सूचनाकर्ता का नाम गुप्त रखता था इसनिए किसी को पता भी नहीं चलता कि शिकायत किसने की थी। लेकिन वह आनंदित होता था। वह लोगो को परेशान करने के नित्त नए तरीके खोजता रहता था। लोग परेशान थे। फिर भी उसका कुछ बिगाड नहीं पा रहे थे। यहॅा तक कि उसके दोनो पुत्र भी उसकी आदतो से परेशान थे। दोनो पुत्र यह सोचकर संतोष कर लेते थे कि अब उनकी उम्र सत्तर साल हो चुकी है। वे अब ज्यादा दिनों के मेहमान नहीं हैं।

गाॅव के लोग भी चाहते थे कि कब रामदेव का पृथ्वी पर कार्यकाल पूरा हो अैार वह किसी दूसरे गृह का वासी बने। एक रोज उसकी तबीयत बिगडी अेार बिगडती ही चली गई। उसे भी महसूस होने लगा कि अब जिंदगी अैार मृत्यु के मध्य ज्यादा फासला नहीं रह गया हैं। उसने अपने पुत्रो को पास बुलाकर, विनती भरे स्वर में कहा कि अब मेरा समय निकट आ गया हैं। लगता हैं कि अपना साथ यहीं तक था। वह दो फिट का डंडा सदैव साथ रखता था। वह पतला सा डंडा उसकी खाट के पास ही पडा था। उसने डंउा उठाया अैार कहा कि यह डंडा जीवनभर मेरे साथ रहा इसलिए मेरी अतिंम ईच्छा हैं कि मेरे देहांत के बाद मेरा डंडा, मेरे मुॅह में रख दिया जाए। आप लोग मुझे अंतिम स्नान कराने के बाद यह डंडा मेरे मुॅह मे रख देना। दोनो पुत्रो ने हॅा में गदर्न हिला दी।

उपचार अपना असर दिखा ही नहीं रहा था। एक घडी ऐसी आई कि उसकी श्वांस रुक गई। दिखावे के लिए तो मातम मनाया गया। उसकी चिता तैयार की गई। उसकी अजीबोगरीब अंतिम इच्छा की पूर्ति भी की गई। उसके जीवनभर साथ रहा डंडां, उसके मुह में रखकर कफन पहना दिया गया। ऐसी अर्थी पहले किसी ने देखी नहीं थी। डंडा सफेद कपडे को दो फिट उॅचा किए हुए था। चिता मे लोग राम नाम सत्य की पुनरुक्ति तो कर रहे थे लेकिन मन ही मन सोच रहे थे कि इस दुष्ट से पीछा छूटा। पृथ्वी का भार हल्का हुआ। अब गाॅव में सदभाव का वातावरण निर्मित हो सकेगा।

गाॅव की पुलिस चौकी मरघट के रास्ते में ही पडती थी। प्रत्येक शव यात्रा को उस पुलिस चौकी के सामने से गुजरना ही होता था। अन्य कोई मार्ग मरघट तक जानें का नहीं था। दुष्ट की शव यात्रा पुलिस चौकी के सामने से गुजर रही थी। चौकी के बाहर दो सिपाही आने जाने वाले वाहनो पर नजर रख रहे थे। उन्हे राम नाम सत्य है, का स्वर सुनाई दिया तो दोनो की नजर अर्थी पर पडी। एक सिपाही दूसरे के कान में फुसफुसाया --

‘’ उधर देखो। मॅागीलाल। रहस्यमय अर्थी आ रही है।'’ मॅागीलाल ने गौर से देखा। वह पहले सिपाही के कान मे फुसफुसाया----

‘’ हम रोज, यहॅा नाकाबंदी के दौरान मरघट की अेार जाती हुई अर्थियों को देखते है। परंतु ऐसी अर्थी पहले कभी देखी नहीं। देखो अर्थी के मुॅह में वायरलेस जैसा कुछ नजर आ रहा है।'’’

मॅागीलाल बोला -- ‘’ लगता है कि मामला गडबड है। तुम अर्थी को रुकवाअेा , मै, चौकी से हवलदारजी को बुलाकर लाता हॅू।'’

उसने अपने साथी के जवाब का इंतजार ही नहीं किया। चैाकी से हवलदार केा बुलाने दौड गया।

इधर दूसरे सिपाही ने अर्थी ले जाने वालो को रुकने का इशारा किया तो वे सकते में आ गए। एक दूसरे को इशारो ही इशारो में पूछ रहे थे कि क्या हुआ। तभी माॅगीलाल, भारीभरकम जिस्‍म वाले हवलदार को लेकर अर्थी के पास आया। हवलदार रोबदार आवाज में बोला---

‘’ अर्थी को नीचे रखो। हम चेक करेंगें।'’

मृतक के पुत्रो ने इतराज किया लेकिन हवलदार ने उनकी एक नही सुनी। अर्थी को नीचे रखा गया। फिर हवलदार ने आदेश दिया--

’’यह एरियल सा क्या है। खोलकर दिखाअेा ।'’

‘’श्रीमान, अर्थी को रास्ते में खोलना धर्म सम्वत नही है। हम आपको मरघट में चल कर दिखा देंगे।'’

‘’ हमारे पिताजी की अंतिम इच्छा थी कि उनका प्रिय डंडा, उन्हे स्नान कराने के बाद उनके मुॅह में रख दिया जाए।'

बडे पुत्र ने सहमत-सहमते स्थिति को स्पष्ट किया ताकि कपडा नहीं हटाना पडे। लेकिन हवलदार ने आज तक ऐसी अर्थी या अंतिम ईच्छा न तो सुनी थी और न ही देखी थी इसलिए बडे पुत्र को उपर से नीचे तक देखा-- अैार सख्त लहजे में बोला--

’’ पुलिस को बेवकुफ समझ रखा है। कपडा हटाअेा। '’

अब कपडा हटाना पडा। शव के मुॅह में दों फिट का डंडा था। हवलदार को शक हेा गया कि मृतक धनी आदमी था इसलिए उसकी संतान अैार निकट संबंधियो ने संपति के लालच में आकर उसकी हत्या की है। वह शव को चोकी के भीतर ले गया अैार उसने निष्कर्ष निकाला कि गले में डंडा ठॅूसकर हत्या की ग्ई है। उसने निकट परिजनो पर हत्या का अैार शव यात्रा में शामिल लोगो पर हत्या के षडयंत्र में शामिल होने का मुकदमा दर्ज करके सब लोगो को हवालात में बंद कर दिया।

आगे जारी है......... 

अगला ब्लॉग / भाग पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे......... 

 
 
 

About Me

WhatsApp Image 2025-..._imresizer.jpg

नमस्ते, मैं अय्यूब आनंद
आपका स्वागत करना मेरे लिए प्रसन्नता की बात है।

Osho the Great

Posts Archive

Keep Your Friends
Close & My Posts Closer.

"मुझे एक प्रार्थना भेजें,
और मैं आपको एक प्रार्थना वापस भेजूंगा।"

  • Twitter
  • Facebook
  • Instagram

Contact us

© 2035 by Ayub Khan Powered and secured by Wix

bottom of page